Friday, September 16, 2011

हिंदी समिति द्वारा आयोजित "हिंदी रसावली" कार्यक्रम

भारतीय विज्ञान संस्थान में अक्सर लोग अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग करते हैं| विज्ञान में हिंदी का महत्तम उपयोग और कर्नाटक के लोगों में हिंदी के ज्ञान का अभाव इसके मुख्य कारण हैं| इसलिए भारतीय विज्ञान संस्थान की हिंदी समिति हर साल हिंदी दिवस का रमणीय उत्सव मनाती है| इस साल भी इस उत्सव को १४ सितम्बर के दिन धूमधाम से मनाया गया| 
इस कार्यक्रम के मुख्य भाग थे स्वरचित कविता पठन और अन्ताक्षरी| स्वरचित कविता पठन के अंतर्गत हम सभी लोगों ने श्रेष्ठ कविताओं को सुनने का अभूतपूर्व आनंद उठाया| न जाने कितने भाइयों और बहनों ने सभी उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया| कार्यक्रम के मुख्य अतिथि- भारतीय विज्ञान संस्थान के प्राध्यापक  श्रीमती थिलगम मैडम एवं श्री रूद्र प्रताप सिंह साहब भी इन उन्नत कवियों और कवयित्रियों की दाद देते हुए फुले न समाये| इसके पश्चात अन्ताक्षरी का दौर शुरू हुआ जिसमे १६ छात्रों ने भाग लिया| चारों दलों-पनवा चबा, दिल जले, मिलेंगे मिलेंगे, उद्घोष ने बहतरीन और विनोदमय प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम पर चार चाँद लगा दिए| श्री रूद्र साहब ने भी कार्यक्रम के उपलक्ष में कहते हुए अपने वाक्-चातुर्य से कुछ ही शब्दों में सभी हा मन हर लिया| सचमुच, यह कार्यक्रम इस उत्कृष्ट संस्था में बिताये गए यादगार पलों में से एक है|

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